प्रतीकात्मक चित्र

उत्तर प्रदेश और बिहार में प्राथमिक शिक्षकों के लगभग चार लाख पद खाली

दिल्ली एनसीआर: उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों में कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी विद्यालयों में लगभग छह लाख पद खाली हैं। इनमें से लगभग 4 लाख पद उत्तर प्रदेश और बिहार में ही खाली हैं। हिंदी भाषी राज्यों की ओर से दिए गए आंकड़ों से इन खाली पदों का पता चला है। हिंदी भाषी राज्यों की कार्यक्रम अनुमोदन बैठक में शिक्षा अभियान के अंतर्गत रिक्त पदों की संख्या ज्ञात हुई है।
उत्तर भारत के राज्य दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड एवं राजस्थान में उत्तर प्रदेश व बिहार राज्य की तुलना में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या की स्थिति बहुत स्तर तक अच्छी है। उत्तर प्रदेश और बिहार में ही शिक्षकों की खाली पदों की संख्या लगभग चार लाख के करीब है।
दक्षिण भारत की स्थिति काफी अच्छी
वहीं दक्षिण भारत के राज्य केरल और तमिलनाडु मैं शिक्षकों की संख्या के हिसाब से स्थिति बहुत अच्छी है।
शिक्षा अभियान के अंतर्गत होने वाली (पीएबी) की बैठक में शिक्षकों की संख्या और स्थिति के आंकड़ों का खुलासा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों में लगभग 6 लाख स्वीकृत पद खाली पड़े हुए हैं। वहीं इनमें से लगभग चार लाख प्राथमिक एवं जूनियर शिक्षकों के पद हिंदी भाषी उत्तरप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में खाली हैं। शिक्षकों की कमी के चलते इन राज्यों में 80 फीसदी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 2 विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं है।
वहीं शिक्षक और छात्रों की संख्या का अनुपात मानकों से कहीं स्तर तक बिगड़ा हुआ है।

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